तजुर्बा एक बार का ही इबरत के लिए काफ़ी था ! मैंने देखा नहीं इश्क़ दुबारा करके !!"

मेरी हर आह ! के बदले वाह ! मिली है मुझको ! कौन कहता है कि दर्द बिकता नहीं !!"

"जिस्म के ज़ख्म का इलाज तो मुमकिन है ! लेकिन रूह के ज़ख्म का हकीम नहीं कोई !!"

"सोचा था एक घर बनाकर बैठूंगा सुकून से ! लेकिन घर की ज़रूरतो ने मुसाफिर बना दिया !!"

"उम्मीद से बढ़कर निकली तुम तो ! मैंने तो सोचा था दिल ही तोड़ोगी तुमने तो मुझे ही तोड़ दिया !!"

"इश्क़ सिर्फ मुझे हुआ था ! उसे तो बस कुछ पल का नशा हुआ था !!"

"दुबारा इश्क़ होगा तो तुझसे ही होगा ! खफा हूँ मैं बेवफा नहीं !!"

अकेले ही गुज़रती है ज़िन्दगी ! लोग तसल्लियाँ तो देते है पर साथ नहीं !!

आ देख मेरी आँखों के ये भीगे हुए मौसम ! किसने कह दिया तुझे भूल गए हम !!"

"बहुत कुछ बदला है मैंने अपने आप में ! लेकिन तुझे याद करने की वो आदत आज भी बाक़ी है !!"

"जल्दी सो जाया करो दोस्तों ! यूँ रातभर जागने से मोहब्बत लौट कर नहीं आती !!"

हर किसी में तुझे पाने की कोशिश की ! बस एक तुझे न पाने के बाद !!

लोग कहते है समझो तो खामोशियाँ भी बोलती हैं ! मैं बरसो से खामोश हूँ और बरसो से बेखबर !!"

"जिनके दिल पर चोट लगती है ! वो अक्सर आँखों से नहीं दिल से रोते हैं !!"

"जहां कभी तुम हुआ करते थे ! वहां अब दर्द होता है !!"

"बनना है तो किसी के दर्द की दवा बनो ! जख्म तो हर इंसान देता है !!"

"मेरे बर्दाश्त करने का अंदाज़ा तू क्या लगायेगी ! तेरी उम्र से कही ज़्यादा मेरे जिस्म पर ज़ख्मो के निशाँ हैं !!"

आज तन्हा हुए तो अहसास हुआ ! कई घण्टे होते है एक दिन में !!"

"तू मेरी चाहत का एक लफ्ज़ भी नहीं पढ़ सकी ! और मैं तेरे दिए हुए दर्द की किताब को रोज़ पढ़ते पढ़ते सोता हूँ !!"

अगर मुमकिन हो तो मुझे अपना बनालो तुम ! मेरी तन्हाईयाँ गवाह है मेरा अपना कोई भी नहीं !!"

"एक उम्र बीत गयी तुझे चाहते हुए ! तू आज भी बेखबर है कल की तरह !!"

लोग हमेशा गलत इंसान से धोखा खाने के बाद ! अच्छे इंसान से बदला लेते हैं !!"

"यही सोचकर सफाई नहीं दी हमने ! इल्ज़ाम भले ही झूठे हैं पर लगाए तो तुमने हैं !!"

. "वो मेरे साथ चलते तो थे ! मगर किसी और की तलाश में !!"

ये दिन भी क़यामत की तरह गुज़रा है ! न जाने क्या बात थी हर बात पर रोना आया !!"

"वो एक ख़त जो उसने कभी लिखा ही नहीं ! मैं हर रोज़ उसका जवाब तलाश करता हूँ !!"

. "मोहब्बत सच्ची हो तो लौट कर ज़रूर आती है ! खैर छोड़ो सब कहने की बाते हैं !!"

माना मौसम भी बदलते हैं मगर धीरे-धीरे ! तेरे बदलने की रफ़्तार से तो हवाएं भी हैरान हैं !!

"मुझे कहाँ से आएगा लोगों का दिल जीतना ! मैं तो अपना भी हार बैठा हूँ !!"

"कौन समझ पाया आज तक हमें ! हम अपने हादसों के अकेले गवाह हैं !!"